हॉल की मद्धम पीली रोशनी में समय जैसे ठहर गया था। हवा में सिर्फ उनकी भारी होती साँसों का शोर था और स्ट्रॉबेरी लोशन की वह मीठी खुशबू, जो अब आर्यन के फेफड़ों में ज़हर की तरह उतर रही थी—एक ऐसा ज़हर, जिसे वह बार-बार पीना चाहता था।
आर्यन के होंठ अब मायरा के होठों पर किसी प्यासे मुसाफिर की तरह टूट पड़े थे। यह अब कोई साधारण चुंबन नहीं था; इसमें बरसों का दबा हुआ संयम, समाज का डर और अपनी ही 'बेटी' जैसी अमानत के प्रति जागती हुई वह 'मर्दाना हवस' सब कुछ मिल चुका था। आर्यन ने अपनी ज़बान मायरा के मुँह के अंदर डाल दी, जैसे वह उसकी रूह का स्वाद चखना चाहता हो। मायरा ने भी पूरी शिद्दत से उसका साथ दिया, अपनी उंगलियाँ आर्यन की गर्दन के पीछे बालों में फंसा दीं और उसे अपने और करीब खींच लिया।




















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