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Chapter 1 Hero's ki anokhi entry

शाम का सूरज क्षितिज की ओट में ढल रहा था। गहरे नारंगी और सिंदूरी बादलों के सीने को चीरता हुआ आसमान का रंग धीरे-धीरे स्याह नीले और अंधेरे में तब्दील हो रहा था।

35,000 फीट की ऊँचाई पर, तूफानी हवाओं के बीच एक चमचमाता, गन-मेटल ग्रे रंग का 'गल्फस्ट्रीम G650' प्राइवेट जेट लगभग 900 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ रहा था। बाहर का नज़ारा भले ही शांत और सुकून देने वाला दिख रहा था, लेकिन उस जेट के भीतर का माहौल इतना भारी और संगीन था कि हवा भी साँस लेने से कतरा रही थी।

यह कोई साधारण जेट नहीं था, और न ही इसमें बैठे यात्री कोई आम इंसान थे। इस जेट के आलीशान केबिन में दुनिया की सबसे ताकतवर, क्रूर और बेखौफ सत्ता बैठी थी—'रायज़ादा ब्रदर्स'।

कॉर्पोरेट की चमचमाती दुनिया से लेकर अंडरवर्ल्ड के सबसे अंधेरे गलियारों तक, यह पाँच नाम खौफ और सल्तनत का दूसरा नाम थे। दुनिया का बड़े से बड़ा अरबपति बिजनेसमैन उनके सामने बातचीत से पहले सौ बार सोचता था, और अंतरराष्ट्रीय माफिया का बड़े से बड़ा डॉन भी उनके नाम मात्र से काँप उठता था। एशिया, यूरोप और अमेरिका के बड़े-बड़े शेयर बाज़ारों में जब रायज़ादा भाइयों की उंगलियाँ उठती थीं, तो सरकारें हिल जाती थीं। और जब उनकी बंदूकों की ट्रिगर दबती थी, तो पूरा का पूरा नामो-निशान मिट जाता था।

पर इस वक्त, इस 50 मिलियन डॉलर के जेट का केबिन लाल रंग की चेतावनी वाली आपातकालीन लाइटों से नहलाया हुआ था। डैशबोर्ड से एक तीखी, लगातार बजने वाली अलार्म की आवाज़ आ रही थी—बीप... बीप... बीप...

केबिन के बीचों-बीच रखे ग्लास टेबल पर एक छोटा, डिजिटल टाइमर लगा डिवाइस रखा था। उसके लाल रंग के LED डिस्प्ले पर उलटी गिनती चल रही थी: 04:58... 04:57... 04:56...

यह C4 प्लास्टिक एक्सप्लोसिव से जुड़ा एक रिमोट-कंट्रोल्ड टाइम बम था। किसी दुश्मन ने बड़ी सफाई से जेट के मुख्य फ्यूजलेज़ (ढांचे) में इसे फिट कर दिया था।

जेट के केबिन में पाँचों भाई मौजूद थे, और उनकी शख्सियत ही उस जगह की हवा को भारी बना रही थी।

सबसे बड़े भाई, रणवीर रायज़ादा—उम्र 34 वर्ष। रायज़ादा एम्पायर के मुखिया और अंडरवर्ल्ड के बेताज बादशाह। चेहरे पर बिना किसी झुर्री या घबराहट के, वह शांत खड़े थे। उनकी डार्क ग्रे आँखें बम के टाइमर पर टिकी थीं। चेहरे पर ऐसी बर्फ़ीली खामोशी थी, जैसे मौत उनके लिए कोई नई बात न हो।

दूसरे नंबर पर, विक्रम रायज़ादा—उम्र 32 वर्ष। रायज़ादा ब्रदर्स के 'द ब्रेन'। दुनिया भर का लीगल और इलीगल फाइनेंस, हैकिंग नेटवर्क और वेपन सप्लायर्स का जाल विक्रम ही संभालता था। काले रंग के थ्री-पीस सूट में, वह चेहरे पर हल्की और बेपरवाह मुस्कान लिए सिगार का एक लंबा कश खींच रहे थे।

तीसरे भाई, अथर्व रायज़ादा—उम्र 29 वर्ष। टैक्टिकल एक्सपर्ट और हथियारों के मास्टर। पूर्व मिलिट्री कांट्रैक्टर, जो पलक झपकते ही किसी को भी मौत के घाट उतार सकता था। वह केबिन के स्टोरेज सेक्शन में बिना किसी अफ़रा-तफ़री के कुछ खोज रहे थे।

चौथे भाई, कबीर रायज़ादा—उम्र 26 वर्ष। साइलेंट किलर। हमेशा खामोश रहने वाला, जिसकी उंगलियाँ स्नाइपर राइफल के ट्रिगर पर सबसे ज्यादा तेज़ चलती थीं। वह केबिन के कॉकपिट के दरवाज़े पर टिके खड़े थे, उनके चेहरे पर कोई भाव नहीं था।

और पाँचवें, यानी सबसे छोटे भाई—युवराज रायज़ादा—उम्र 23 वर्ष। परिवार का सबसे शरारती, बिंदास और बड़बोला लड़का, जो हर गंभीर परिस्थिति में भी ड्रामा ढूँढ लेता था।

युवराज केबिन के सोफे पर बैठा अपने सिर पर हाथ रखे हुए था। टाइमर की लाल बत्तियां उसकी घबराई हुई आँखों में चमक रही थीं। उसने अचानक अपने दोनों हाथ हवा में उठाए और चीखते हुए बोला,

"साला! कोई चैन से घर भी नहीं जाने देता! हदों की भी हद होती है यार! ज़मीन पर गोलियां चलाओ तो समझ आता है, यहाँ हवा में भी बम लगा दिया? मतलब हद ही हो गई दुश्मनगिरी की!"

बाकी चारों भाइयों ने उसे कोई जवाब नहीं दिया। रणवीर ने अपनी कलाई पर बंधी रोलेक्स घड़ी देखी और फिर बम की तरफ देखा।

युवराज सोफे से उछलकर खड़ा हो गया और अपने चारों भाइयों के चेहरे देखने लगा। उसकी आवाज़ में पूरी दुनिया का दुख सिमट आया था,

"अबे सालो! कुछ तो बोलो! मेरी सुनो... मैंने अभी तक एक परमानेंट गर्लफ्रेंड भी नहीं बनाई है! समझे तुम लोग? मैं अभी 23 का हूँ! मैं इस उम्र में सिंगल नहीं मरना चाहता यार! मेरी जवानी का क्या होगा? मेरे होने वाले बच्चों का क्या होगा?"

वह दौड़कर अथर्व के पास गया और उसका कंधा पकड़कर हिलाने लगा, "अथर्व भाई! कुछ तो करो! मुझे बचाओ! अब मेरा और मेरे उन मासूम बच्चों का फ्यूचर, जो अभी दुनिया में आए भी नहीं हैं, तुम चारों के हाथों में है!"

एक पल के लिए केबिन का माहौल इतना अजीब हो गया कि अलार्म की बीप भी धीमी महसूस होने लगी।

रणवीर, विक्रम, अथर्व और कबीर—चारों ने एक साथ मुड़कर युवराज को देखा। उन चारों की आँखों में ऐसी जानलेवा घूरन थी कि अगर निगाहों से इंसान जल सकता, तो युवराज वहीं राख हो जाता।

रणवीर ने ठंडी, भारी और रौबदार आवाज़ में कहा, "शट अप, युवराज।"

विक्रम ने सिगार का धुआँ हवा में छोड़ते हुए ठंडे स्वर में जोड़ा, "भूलो मत, हम चार भी तेरे साथ इसी 35 हज़ार फीट की ऊँचाई पर इस उड़ते हुए बम के अंदर हैं। इसलिए अपनी बकवास बंद कर।"

अथर्व ने स्टोरेज कंपार्टमेंट से एक भारी मेटल बॉक्स खींचकर बाहर निकाला और युवराज के सीने पर दे मारा, "दिमाग का दही मत कर यूवी। अगर एक और शब्द बोला, तो बम फटने से पहले मैं तुझे इस जेट से बिना पैराशूट के नीचे फेंक दूंगा।"

युवराज ने मेटल बॉक्स पकड़ा और हैरान होकर बोला, "मगर कैसे भाई?! सालो, ये मत भूलो कि हम ज़मीन पर नहीं, हवा में हैं! हवा में! अगर यहाँ से नीचे कूदे ना, तो सीधे ऊपर का टिकट पक्का है! यमराज नीचे रिसेप्शन लेकर खड़ा मिलेगा!"

अथर्व ने उसकी बात को पूरी तरह नजरअंदाज किया और उस मेटल बॉक्स का भारी लॉक तोड़ दिया। अंदर से पाँच ब्लैक-कैमॉफ्लाज (सैन्य रंग वाले) पैराशूट बैग निकले।

अथर्व ने मुस्कुराते हुए एक बैग विक्रम की तरफ फेंका, एक कबीर को दिया, एक रणवीर के हाथों में थमाया, और आखिरी बैग युवराज के मुँह पर दे मारा।

युवराज ने पैराशूट बैग को ऐसे देखा जैसे उसने कोई एलियन की चीज़ देख ली हो। उसने अपनी आँखें बड़ी-बड़ी कीं और बोला, "अच्छा? तो इसके साथ कूदेंगे हम? वाओ! क्या ब्रिलियंट आइडिया है! सालो, पर देखना... कूदते वक्त मेरा हाथ कसकर पकड़कर रखना, समझे ना? वरना पता चला मैं हवा के झोंके से तुम लोगों से बिछड़ गया और किसी दूसरे देश में जा गिरा!"

रणवीर ने अपने कंधे पर पैराशूट बैग के स्ट्रैप्स को कसते हुए एक कड़क निगाह युवराज पर डाली।

"यूवी, अब चुपचाप बैग पहन," रणवीर की आवाज़ में ऐसा हुक्म था जिसे टालने की हिम्मत पूरे रायज़ादा खानदान में किसी की नहीं थी। "हमारे पास बातें करने का वक्त नहीं है। टाइमर देखो। ठीक 3 मिनट बाद यह जेट राख का ढेर बन जाएगा। हमें अभी के अभी जंप करना होगा।"

"तीन मिनट?!" युवराज ने चीखते हुए कहा और किसी रोबोट की तरह तेज़ी से पैराशूट बैग अपने कंधों पर चढ़ाने लगा।

पाँचों भाइयों ने कुछ ही सेकंडों में अपने-अपने पैराशूट बैग्स पहन लिए और उनके चेस्ट-बकल्स को लॉक कर दिया। कबीर ने जेट के पिछले हिस्से में बने इमरजेंसी एग्जिट डोर के पास जाकर लॉक लीवर को कसकर खींचा।

हस्स़्शशशश...!

प्रेशर रिलीज़ होने की एक भयानक आवाज़ आई। केबिन के अंदर की हवा एक झटके से बाहर खिंचने लगी। कागज़, खाली ग्लास और हल्के सामान उड़कर बाहर जाने लगे। जेट के अंदर की तेज़ लाइटें डिम हो गईं और तूफानी हवा का शोर केबिन में गूँज उठा।

बाहर सिर्फ़ गहरा अंधेरा और बादलों के काले साए दिख रहे थे। नीचे कुछ नज़र नहीं आ रहा था—बस एक गहरा, खौफनाक सन्नाटा।

डिजिटल टाइमर पर लाल अक्षर चमक रहे थे: 00:45... 00:44... 00:43...

रणवीर इमरजेंसी डोर के मुहाने पर आकर खड़े हो गए। तेज़ हवा उनके काले बालों और लंबे कोर्ट को पीछे की तरफ उड़ा रही थी। उनकी आँखों में मौत का रत्ती भर भी खौफ नहीं था। उन्होंने मुड़कर अपने चारों भाइयों की तरफ देखा।

"फॉर्मेशन याद है?" रणवीर ने तेज़ हवा के शोर को चीरते हुए कहा।

"फ्री-फॉल 5,000 फीट तक। उसके बाद पैराशूट ऑपरेटर ऑन," विक्रम ने कहा, उनके चेहरे पर अब भी वही खतरनाक मुस्कान थी।

"मैं यूवी पर नज़र रखूँगा," कबीर ने अपनी ठंडी आवाज़ में कहा।

"मुझे पकड़ने की ज़रूरत नहीं है, मैं खुद संभाल लूँगा... बस नीचे कोई पहाड़ न हो!" युवराज ने चिल्लाकर हवा के शोर में अपनी बात पहुँचाने की कोशिश की।

रणवीर ने अपनी दाहिनी बाँह आगे बढ़ाई। विक्रम, अथर्व, कबीर और युवराज ने बिना एक पल गंवाए अपने-अपने हाथ एक-दूसरे की कलाई पर कसकर बाँध लिए। पाँचों भाइयों की उंगलियाँ एक-दूसरे की चमड़े की जैकेट्स पर कस गईं। यह उनका अनकहा वादा था—जीएंगे तो साथ, मरेंगे तो साथ।

डिजिटल टाइमर: 00:10... 00:09... 00:08...

"जंप!" रणवीर की दहाड़ के साथ ही पाँचों भाइयों ने एक साथ जेट के खुले दरवाज़े से बाहर नीले-काले शून्य में छलांग लगा दी।

धड़ामмммм!!

जैसे ही पाँचों भाइयों के शरीर जेट से अलग होकर हवा में तैरे, ठीक तीन सेकंड बाद उनके पीछे आसमान में एक भयानक, सूरज जैसा लाल-पीला आग का गोला फटा।

बॉअअअअमममममम!!

50 मिलियन डॉलर का गल्फस्ट्रीम जेट हवा में ही हज़ारों जलते हुए टुकड़ों में तब्दील हो गया। एक ज़ोरदार सदमे की लहर (Shockwave) ने हवा को चीर दिया। आग की लपटें इतनी तेज़ थीं कि कुछ पलों के लिए पूरा काला आसमान रात में भी दिन की तरह चमक उठा। जेट के जलते हुए टुकड़े, पंख और इंजन जलते हुए उल्कापिंडों की तरह नीचे की तरफ गिरने लगे।

उस आग के गोले के ठीक नीचे, पाँचों रायज़ादा भाई फ्री-फॉल में थे।

हवा का दबाव इतना भयानक था कि चेहरे की त्वचा खिंच रही थी। कानों में सिर्फ़ हवा के फटने की सां-सां की आवाज़ आ रही थी। 35,000 फीट की ऊँचाई से वे लगभग 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से सीधे ज़मीन की तरफ गिर रहे थे। पीछे आसमान में जेट के जलते हुए मलबे से काला धुआँ उठ रहा था।

युवराज हवा में गोते खाते हुए चिल्ला रहा था, हालांकि उसकी आवाज़ हवा के शोर में दब रही थी, "आहhhhh! ये तो रोलरकोस्टर से भी भयानक है!! भाई... मेरा हाथ मत छोड़ना!"

रणवीर ने अल्टीमीटर (ऊँचाई मापने वाली घड़ी) पर नज़र दौड़ाई।

15,000 फीट... 10,000 फीट... 7,000 फीट... 5,000 फीट!

"नाउ!" रणवीर ने ज़ोर से सिग्नल दिया।

पाँचों भाइयों ने अपनी कलाई को छुड़ाया और एक झटके में अपने-अपने पैराशूट की रिपकॉर्ड (डोर) खींच दी।

फटाक! फटाक! फटाक! फटाक! फटाक!

एक के बाद एक, पाँचों के काले रंग के मिलिट्री-ग्रेड टैक्टिकल पैराशूट हवा में खुल गए। अचानक एक ज़ोरदार झटका लगा, और उनकी नीचे गिरने की रफ़्तार एकदम से धीमी हो गई। वे हवा में झूलते हुए धीरे-धीरे नीचे की ओर आने लगे।

युवराज ने एक लंबी साँस ली और अपना माथा पोंछा, "अरे बाप रे! बच गए! दिल हलक में आ गया था यार!"

"अभिषेक अभी खत्म नहीं हुआ है, यूवी," विक्रम ने ऊपर हवा में झूलते हुए कहा। "नीचे देखो।"

युवराज ने नीचे झांका। और देखते ही उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं।

नीचे कोई शहर नहीं था। कोई सड़कें नहीं थीं। कोई लाइटें नहीं थीं।

नीचे सिर्फ़ और सिर्फ़ एक विशाल, अनकहा, और घनघोर काला जंगल फैला हुआ था। विशालकाय ऊँचे पेड़ों की छत (Canopy) इतनी घनी थी कि ज़मीन का एक इंच हिस्सा भी नज़र नहीं आ रहा था। दूर-दूर तक केवल अंधेरा, खामोशी और खूंखार पेड़ों के साए थे।

यह 'ब्लैक वैली फ़ॉरेस्ट' था—एक ऐसा प्रतिबंधित और खतरनाक इलाका जहाँ इंसान तो क्या, परिंदे भी रास्ता भूल जाते थे। इस जंगल के बारे में कहावत थी कि जो एक बार इसके अंदर कदम रखता है, उसकी हड्डियां भी वापस बाहर नहीं आतीं।

"अरे यार... यह कहाँ आ गए हम?!" युवराज ने रोनी सूरत बनाते हुए कहा। "किसी पाँच सितारा होटल के स्वीट में लैंडिंग नहीं हो सकती थी क्या? यह जंगल में कौन लैंड करता है!"

"चुप रहो," कबीर ने नीचे देखते हुए कहा। "पेड़ों की टहनियाँ बहुत घनी हैं। अगर पैराशूट उलझा, तो गर्दन टूट जाएगी।"

"सभी लैंडिंग पोजीशन लो!" रणवीर ने हुक्म दिया। "पैरों को मोड़ो, सिर को ढको। पेड़ों के बीच से रास्ता बनाकर सीधे ज़मीन पर टिकना है। कोई अलग नहीं होगा!"

अगले ही पल, पाँचों पैराशूट तेज़ी से घने जंगलों के पेड़ों की पत्तियों और विशाल टहनियों से टकराने लगे।

क्रैश! स्नैप! छपाक!

टहनियों के टूटने की भयानक आवाज़ें पूरे जंगल में गूँज उठीं। पत्तियाँ हवा में उड़ने लगीं। विशालकाय बरगद और सागौन के पेड़ों की मजबूत डालियाँ पैराशूट के कपड़ों को चीरने लगीं।

रणवीर ने कुशलता से अपनी बॉडी को रोल किया और एक मोटी टहनी पर पैर टिकाकर ज़मीन पर एक परफेक्ट कॉम्बैट रोल (घुमाव) के साथ लैंड किया।

उनके ठीक बगल में विक्रम और कबीर भारी आवाज़ के साथ ज़मीन पर उतरे। अथर्व ने एक पेड़ के तने का सहारा लेकर खुद को संभाला।

लेकिन युवराज...

कड़ाक!

"अरे... अरे... बचाओ!"

युवराज का पैराशूट एक ऊँचे सागौन के पेड़ की सबसे ऊपरी डाल पर बुरी तरह उलझ गया। युवराज ज़मीन से लगभग 20 फीट की ऊँचाई पर हवा में उल्टे लटके हुए झूल रहा था। उसके पैर ऊपर और सिर नीचे था।

रणवीर, विक्रम, अथर्व और कबीर ने धूल झाड़ते हुए अपने-अपने पैराशूट के बेल्ट्स खोले और ऊपर हवा में लटके युवराज को देखने लगे।

युवराज ने नीचे लटकते हुए दुखी मन से अपने चारों भाइयों को देखा, "वाह! बहुत बढ़िया! तुम चारों नीचे हीरो की तरह लैंड हुए हो और मैं यहाँ चमगादड़ की तरह उल्टा लटका हुआ हूँ! भाई... कोई मुझे नीचे उतारेगा या यहीं मेरा सुखाकर अचार बनाओगे?"

अथर्व ने अपनी कमर से एक धारदार टैक्टिकल चाकू निकाला और ठंडी मुस्कान के साथ कहा, "अगर तूने दो मिनट में अपना मुँह बंद नहीं किया, तो मैं नीचे से रस्सी काट दूंगा। सीधे सिर के बल गिरेगा।"

युवराज ने तुरंत अपने होंठों पर उंगली रख ली और म्यूट होने का नाटक करने लगा।

रणवीर ने अपने कोट को सीधा किया और अपने जेब से एक सैटेलाइट फोन निकाला। लेकिन उस पर कोई सिग्नल नहीं था—शून्य।

जंगल इतना घना और गहरा था कि बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट चुका था। रात का घना अंधेरा अब पूरी तरह से जंगल को अपनी आगोश में ले चुका था। चारों तरफ अजीबोगरीब जानवरों की सरसराहट, झिंगुरों की तेज़ आवाज़ें और हवा में तैरती पत्तियों की खड़खड़ाहट गूँज रही थी।

रणवीर ने अपनी डार्क ग्रे आँखों से उस अंधेरे जंगल को देखा। उनके चेहरे पर वही जानलेवा, बर्फ़ीला सुकून था। उन्होंने अपनी कमर से अपनी सिग्नेचर 'कस्टम-मेड 9mm पिस्तौल' निकाली, उसका मैगज़ीन चेक किया और एक क्लिक के साथ लोड कर दिया।

विक्रम, अथर्व और कबीर ने भी बिना कोई शब्द बोले अपने-अपने छुपाए हुए हथियार बाहर निकाल लिए।

"रणवीर भाई," विक्रम ने चारों तरफ का जायजा लेते हुए कहा। "यह जेट का एक्सीडेंट नहीं था। बम बहुत प्लानिंग के साथ लगाया गया था। किसी को पता था कि हम आज रात इस रूट से निकलने वाले हैं।"

रणवीर की आँखें अंधेरे में चमक उठीं। उनकी आवाज़ में ऐसी ठंडक थी जो जंगल की रात से भी ज़्यादा ख़तरनाक थी।

"जिसने भी यह किया है..." रणवीर ने अपनी पिस्टल को होल्स्टर में वापस रखते हुए कहा, "...उसे लगता है कि उसने रायज़ादा ब्रदर्स को आसमान में मार दिया। उसे नहीं पता कि उसने मौत को ज़मीन पर उतार दिया है।"

अथर्व ने एक झटके में ऊपर लटकी हुई रस्सी पर चाकू मारा।

कड़ाक!

"अरे माँ—!" युवराज सीधे नीचे गिरा, लेकिन कबीर ने एन वक्त पर उसकी जैकेट पकड़कर उसे ज़मीन पर पटकने से बचा लिया।

युवराज ने अपनी जैकेट ठीक की और हांफते हुए बोला, "थैंक्स कबीर... कम से कम तू तो इंसान है।"

रणवीर ने अपने चारों भाइयों की तरफ देखा। पाँचों के चेहरे पर खरोंचे थीं, कपड़े गंदे थे, लेकिन उनकी आँखों में जलती हुई आग बता रही थी कि यह तबाही का सिर्फ़ पहला अध्याय था।

"हथियार तैयार रखो," रणवीर ने कहा और जंगल के घने अंधेरे की तरफ कदम बढ़ा दिए। "हमें यहाँ से बाहर निकलने का रास्ता ढूँढना है... और उस इंसान को भी, जिसने रायज़ादा ब्रदर्स के खून की कीमत तय करने की जुर्रत की है।"

पाँचों भाई एक पंक्ति में उस जानलेवा, खामोश और रहस्यमयी जंगल के सीने में आगे बढ़ने लगे।

वे नहीं जानते थे कि इस जंगल की गहराई में सिर्फ़ खूँखार जानवर ही नहीं... बल्कि कुछ ऐसा छिपा था जो रायज़ादा भाइयों की पूरी सल्तनत और उनकी ज़िंदगी की तकदीर को हमेशा-हमेशा के लिए बदलने वाला था!

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