जैसे ही वैदेही ने डाइनिंग हॉल में कदम रखा, उसकी नज़रें टेबल पर पड़ीं। खाना वैसा ही आधा-अधूरा पड़ा हुआ था। रणवीर, विक्रम और अथर्व तीनों अपनी-अपनी जगहों पर सीधे खड़े थे और उनकी आँखें वैदेही को ऐसे घूर रही थीं मानो उसे ज़िंदा चबा जाएँगी।
वैदेही का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। उसकी मासूम आस एक ही पल में बिखरने लगी।




















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